"मुहब्बत "
मुहब्बत को मुहब्बत से ही क्यों मुहब्बत हुई
ये सवाल मन पूछता है?
दिल जवाब देता है....
शायद "इश्क" को "इश्क" करने के लिए "इश्क" की तलाश थी
"खामोश रात" के "खामोश दिल" को "खामोश-ए-लफ्ज़" की जरुरत थी
"प्यार" को "प्यार" से "प्यार निभाने" के लिए "प्यार करने" की जरुरत थी
"एक हमसफ़र" को "हमसफर" बनने के लिए "एक हमसफ़र" की जरुरत थी
- adv. Shrishti Arun Rawat
Comments
Post a Comment